आंध्र प्रदेश : सरकार बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य के आईटी और मानव संसाधन मंत्री नारा लोकेश ने विश्व आर्थिक मंच (WEF) दावोस में ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में खुलासा किया कि सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह बैन ऑस्ट्रेलिया के हालिया कानून से प्रेरित है, जहां दिसंबर 2025 में ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों को टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, स्नैपचैट और X जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर एक्सेस बैन कर दिया गया है।
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो आंध्र प्रदेश भारत का पहला राज्य बनेगा जहां बच्चों के सोशल मीडिया यूज पर कानूनी रोक लगेगी।
नारा लोकेश का बयान: बच्चों की सुरक्षा सबसे ऊपर
दावोस में ब्लूमबर्ग से बातचीत में नारा लोकेश ने कहा, “एक निश्चित उम्र से कम के बच्चों को ऐसे प्लेटफॉर्म पर नहीं होना चाहिए। वे यह नहीं समझ पाते कि वे किस तरह के कंटेंट के संपर्क में आ रहे हैं। ऐसे में एक मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत है।” उन्होंने आगे कहा, “हम राज्य के तौर पर ऑस्ट्रेलिया के अंडर-16 कानून का गहन अध्ययन कर रहे हैं, और हां, मुझे लगता है कि हमें एक मजबूत कानूनी अधिनियम बनाना चाहिए।”

- लोकेश ने जोर दिया कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध कंटेंट बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर
- नकारात्मक असर डाल सकता है। छोटे बच्चे ऑनलाइन हेट, टॉक्सिक कंटेंट, साइबर बुलिंग
- और हानिकारक नेटवर्क्स को ठीक से समझ नहीं पाते, जिससे उनकी मेंटल हेल्थ प्रभावित होती है।
ऑस्ट्रेलिया मॉडल क्या है? आंध्र प्रदेश कैसे लागू कर सकता है!
ऑस्ट्रेलिया ने पिछले महीने (दिसंबर 2025) एक सख्त कानून पास किया, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट बनाने या यूज करने से पूरी तरह रोक दिया गया। प्लेटफॉर्म्स को उम्र सत्यापन (age verification) अनिवार्य करना पड़ता है, और उल्लंघन पर भारी जुर्माना लग सकता है।
आंध्र प्रदेश सरकार इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत:
- 16 साल से कम उम्र के बच्चे नए अकाउंट नहीं बना पाएंगे।
- मौजूदा अकाउंट्स भी बंद या निष्क्रिय किए जा सकते हैं।
- प्रभावित प्लेटफॉर्म्स: टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब, स्नैपचैट, X (ट्विटर) आदि।
टीडीपी प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने भी इस कदम का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “कम उम्र के बच्चे भावनात्मक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि वे ऑनलाइन नकारात्मक और नुकसानदायक कंटेंट को समझ सकें। यह कदम बच्चों को जहरीले कंटेंट और मानसिक नुकसान से बचाने के लिए है। हम दुनिया के सर्वश्रेष्ठ उदाहरणों का अध्ययन कर रहे हैं।”
क्यों उठ रहा है यह कदम? मुख्य कारण
- मेंटल हेल्थ पर असर: सोशल मीडिया से बच्चों में डिप्रेशन, एंग्जायटी, बॉडी इमेज इश्यूज बढ़ रहे हैं।
- साइबर क्राइम और बुलिंग: ऑनलाइन ट्रोलिंग, सेक्सटिंग, प्रीडेटर्स का खतरा।
- कंटेंट एक्सपोजर: हिंसा, नफरत, गलत जानकारी से प्रभावित होना।
- पिछले अनुभव: पिछले YSRCP सरकार में सोशल मीडिया का दुरुपयोग हुआ, महिलाओं पर अटैक हुए – अब सुरक्षा पर फोकस।
यह प्रस्ताव सेंट्रल गवर्नमेंट के IT रूल्स और POCSO एक्ट से अलग राज्य स्तर का कानून होगा।
क्या होगा आगे? लागू होने की संभावना
- फिलहाल यह सिर्फ विचार और अध्ययन का चरण है। सरकार ऑस्ट्रेलिया मॉडल की कार्यप्रणाली
- चुनौतियां और भारत में लागू करने की संभावनाओं का विश्लेषण कर रही है।
- कोई टाइमलाइन नहीं बताई गई, लेकिन अगर लागू हुआ तो भारत में बच्चों की डिजिटल
- सुरक्षा में बड़ा बदलाव आएगा। अन्य राज्य भी इसे फॉलो कर सकते हैं।
बच्चों की सुरक्षा vs डिजिटल फ्रीडम
यह प्रस्ताव बच्चों की सुरक्षा के पक्ष में है, लेकिन कई लोग इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक मान सकते हैं। क्या आपको लगता है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन सही कदम होगा? या पैरेंटल कंट्रोल काफी हैं? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं!







