यूपी में SIR : उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) फेज 2 के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 2.89 करोड़ नाम हटाए जाने पर राजनीतिक बवाल मच गया है। विपक्षी पार्टियां इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ और ‘बड़ी साजिश’ बता रही हैं, जबकि BJP और चुनाव आयोग (EC) पर आरोप लगा रही हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP) और AIMIM ने इस मुद्दे पर जांच की मांग की है। 7 जनवरी 2026 को प्रकाशित ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में अब 12.5 करोड़ से ज्यादा वोटर्स बचे हैं, जो राज्य के 15.4 करोड़ इलेक्टोरेट का 81.3% है। इस ब्लॉग में हम इस विवाद की पूरी डिटेल्स, विपक्ष के आरोप, EC की सफाई और राजनीतिक प्रभाव पर चर्चा करेंगे।
यूपी में SIR यूपी वोटर डिलीट का पूरा मामला
उत्तर प्रदेश में SIR फेज 2 के दौरान घर-घर जाकर वोटरों की जांच की गई। EC के अनुसार, कुल 12 करोड़ 55 लाख एन्यूमरेशन फॉर्म्स रिसीव हुए, लेकिन 1.13 करोड़ फॉर्म्स रिटर्न नहीं हुए। परिणामस्वरूप, ड्राफ्ट लिस्ट से 2.89 करोड़ नाम हटाए गए। ब्रेकडाउन इस प्रकार है:

- मृतक वोटर्स: 46.23 लाख (2.99%) नाम हटाए गए।
- शिफ्टेड या मिसिंग वोटर्स: 2.17 करोड़ (14.1%) नाम, जो घर छोड़ चुके हैं, BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) की विजिट के दौरान नहीं मिले या ट्रेस नहीं हो सके।
- डुप्लिकेट एंट्री: 25.47 लाख (1.6%) नाम, जो एक से ज्यादा जगह रजिस्टर्ड थे।
EC ने बताया कि क्लेम्स और ऑब्जेक्शंस की पीरियड 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक है। 403 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) और 2042 असिस्टेंट EROs इसकी जांच करेंगे, जो 27 फरवरी तक पूरी होगी। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त AEROs नियुक्त किए गए हैं। EC चीफ इलेक्शन ऑफिसर नवदीप रिनवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष है और वोटर्स को नाम जुड़वाने का मौका मिलेगा।
यह डिलीट यूपी जैसे बड़े राज्य में चुनावी तैयारी का हिस्सा है, जहां वोटर लिस्ट की सफाई जरूरी है। लेकिन विपक्ष इसे PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वोटर्स को टारगेट करने की साजिश बता रहा है।
विपक्ष का हमला: ‘लोकतंत्र की हत्या’ और ‘बैकडोर NRC’
विपक्ष ने इस मुद्दे पर BJP और EC को घेरा है।
- कांग्रेस: स्टेट प्रेसिडेंट अजय राय ने कहा, “2.89 करोड़ वोटर्स के नाम हटाना जांच का विषय है। 1.13 करोड़ फॉर्म्स रिटर्न नहीं हुए। यह बड़ी साजिश है, जांच होनी चाहिए।” कांग्रेस MP प्रमोद तिवारी ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ बताया और कहा, “कांग्रेस की चिंता सही साबित हुई। करीब 3 करोड़ नाम हटाए गए। BJP यूपी से साफ हो जाएगी।”
- समाजवादी पार्टी (SP): चीफ श्याम लाल पाल ने हाल की 9 विधानसभा उपचुनावों में अनियमितताओं का आरोप लगाया, जहां पुलिस और अधिकारियों ने वोटर्स को बूथ पहुंचने से रोका और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स ने सरकार के इशारे पर वोट डाले। उन्होंने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ कहा। SP नेता फखरुल हसन चांद ने PDA वोटर्स की सुरक्षा पर जोर दिया: “SP PDA वोट्स की रक्षा कर रही है और आगे भी करेगी। हम इस मुद्दे पर सतर्क हैं।”
- AIMIM: चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में SIR को ‘बैकडोर
- NRC’ बताया और कहा कि यह धार्मिक आधार पर वोटर्स को हटाने की कोशिश है।
- #विपक्ष का दावा है कि यह सिलेक्टिव डिलीट है, जो विपक्षी वोट बैंक को कमजोर करेगा।
- वे EC की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।
BJP और EC की सफाई
BJP की ओर से कोई सीधा बयान नहीं आया है। EC ने अपनी सफाई में कहा कि डिलीट प्रक्रिया नियमों के तहत हुई है। नवदीप रिनवा ने स्पष्ट किया कि मृतक, शिफ्टेड या डुप्लिकेट नाम हटाए गए हैं। EC ने जोर दिया कि क्लेम्स पीरियड में कोई भी नाम जुड़वा सकता है। EC का कहना है कि यह वोटर लिस्ट की शुद्धता के लिए जरूरी है और कोई साजिश नहीं है।
राजनीतिक प्रभाव: यूपी चुनाव पर असर?
- यूपी भारत का सबसे बड़ा इलेक्टोरल स्टेट है, जहां वोटर लिस्ट का मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहा है।
- यह विवाद 2027 विधानसभा चुनाव से पहले आया है, जो BJP के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर PDA वोटर्स को एकजुट कर सकता है।
- अगर जांच हुई तो EC की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे।
- विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे डिलीट से चुनावी भागीदारी प्रभावित हो सकती है
- खासकर ग्रामीण और अल्पसंख्यक इलाकों में।
- यह मामला लोकतंत्र की मजबूती पर सवाल उठाता है। EC को पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी, वरना विवाद बढ़ेगा।
जांच जरूरी या राजनीतिक स्टंट?
- यूपी वोटर डिलीट विवाद ने राजनीति को गर्मा दिया है। विपक्ष की जांच मांग जायज लगती है
- क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाना संदेह पैदा करता है। BJP और EC को जवाब देना होगा।
- लोकतंत्र में वोटर राइट्स सर्वोपरि हैं। अधिक अपडेट के लिए न्यूज फॉलो करें।
- क्या यह साजिश है या जरूरी सफाई? कमेंट में बताएं!










