उद्धयनिधि स्टालिन : तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उद्धयनिधि स्टालिन को मद्रास हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनके 2023 के विवादित बयान को हेट स्पीच करार दिया है, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म को मलेरिया, कोरोना जैसी बीमारी बताकर इसे उखाड़ फेंकने (उन्मूलन) की अपील की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि डीएमके और उसके पूर्ववर्ती द्रविड़ कझगम ने पिछले 100 सालों से हिंदू धर्म पर हमला किया है। साथ ही, बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया गया। यह फैसला 21 जनवरी 2026 को आया, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
उद्धयनिधि स्टालिन का मूल बयान क्या था?
सितंबर 2023 में चेन्नई में ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ में उद्धयनिधि ने कहा था, “सनातन धर्म सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है। इसे विरोध नहीं, बल्कि समाप्त करना चाहिए।” उन्होंने सनातन की तुलना मलेरिया, डेंगू और कोरोना से की और कहा कि जैसे इन बीमारियों को खत्म किया जाता है, वैसे ही सनातन को उखाड़ फेंकना जरूरी है। तमिल में उन्होंने ‘सनातन ओझिप्पु’ (उन्मूलन) शब्द इस्तेमाल किया, न कि ‘एथिरप्पू’ (विरोध)। इस बयान से देशव्यापी बवाल मचा था, और कई राज्यों में उनके खिलाफ FIR दर्ज हुईं।

- उद्धयनिधि, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और डीएमके युवा विंग के प्रमुख हैं।
- उन्होंने बाद में सफाई दी कि उनका इरादा हिंदुओं या हिंदुत्व के खिलाफ नहीं
- बल्कि जातिवाद और छुआछूत जैसी प्रथाओं के खिलाफ था। लेकिन कोर्ट ने इसे हेट स्पीच माना।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियां!
मद्रास हाईकोर्ट ने फैसले में कहा:
- “पिछले 100 साल में द्रविड़ कझगम और डीएमके ने हिंदू धर्म पर हमला किया है। उद्धयनिधि इसी पार्टी से हैं।”
- “मंत्री के बयान में सनातन को खत्म करने की अपील साफ है। यह हेट स्पीच है
- क्योंकि इससे उसके अनुयायियों पर हमला होता है।”
- “बड़े दुख की बात है कि हेट स्पीच करने वाले आजाद घूमते हैं, जबकि सवाल उठाने वालों पर कानूनी कार्रवाई होती है।”
- “सत्ता में बैठे लोगों को जिम्मेदारी से बोलना चाहिए, न कि समाज को बांटने वाले विचार फैलाने चाहिए।”
- कोर्ट ने अमित मालवीय की याचिका पर उनके खिलाफ तमिलनाडु में दर्ज FIR रद्द की।
- मालवीय ने उद्धयनिधि के बयान पर सवाल उठाए थे। हालांकि, तमिलनाडु में उद्धयनिधि
- के खिलाफ कोई FIR नहीं थी, लेकिन अन्य राज्यों में केस चल रहे हैं।
राजनीतिक संदर्भ और विवाद
यह मामला 2023 से चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2025 में उद्धयनिधि के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की याचिकाएं खारिज की थीं। मार्च 2024 में मद्रास हाईकोर्ट ने उनके बयान को ‘विकृत’ बताया था, लेकिन मंत्री पद से हटाने से इनकार किया। अब 2026 में हाईकोर्ट का यह फैसला डीएमके सरकार के लिए चुनौती है।
- बीजेपी ने इसे ‘सनातन विरोधी मानसिकता’ का सबूत बताया, जबकि डीएमके इसे
- ‘सामाजिक न्याय’ की लड़ाई कहती है। तमिलनाडु में डीएमके का द्रविड़ मॉडल जातिवाद विरोधी रहा है
- लेकिन उत्तर भारत में इसे हिंदू धर्म विरोधी माना जाता है।
मद्रास हाईकोर्ट का फैसला हेट स्पीच, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन पर नई बहस छेड़ रहा है। क्या उद्धयनिधि के बयान को ‘सामाजिक सुधार’ माना जाए या ‘हेट स्पीच’? कोर्ट ने साफ कहा कि उन्मूलन की अपील हेट स्पीच है। यह फैसला राजनीतिक दलों के लिए सबक है कि धार्मिक मुद्दों पर बोलते समय सावधानी बरतें। मामले में आगे अपील की संभावना है, लेकिन फिलहाल यह डीएमके के लिए बड़ा झटका है।
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