दलाई लामा : 90 साल की उम्र में दलाई लामा ने एक नया इतिहास रच दिया है। तिब्बत के आध्यात्मिक नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दलाई लामा ने अपना पहला ग्रैमी अवॉर्ड जीत लिया है। यह जीत 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स (2026) में बेस्ट ऑडियो बुक, नैरेशन एंड स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग कैटेगरी में मिली है। उनका स्पोकेन-वर्ड एल्बम “Meditations: The Reflections of His Holiness the Dalai Lama” ने यह सम्मान हासिल किया। यह अवॉर्ड उनके लिए न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि शांति करुणा और मानवता के संदेश को दुनिया तक पहुंचाने का एक नया माध्यम बना है।
ग्रैमी जीत का पूरा विवरण
ग्रैमी अवॉर्ड्स की प्री-सेरेमनी में यह अवॉर्ड घोषित हुआ, जिसे यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीम किया गया। दलाई लामा की ओर से अवॉर्ड स्वीकार करने आए संगीतकार रुफस वेनराइट ने इसे प्राप्त किया। इस कैटेगरी में दलाई लामा के खिलाफ मजबूत नाम थे – कमेडियन और ग्रैमी होस्ट ट्रेवर नोआ, यूएस सुप्रीम कोर्ट जज केतंजी ब्राउन जैक्सन, मिली वैनिली के फैब मोर्वन, और एक्ट्रेस कैथी गार्वर। लेकिन दलाई लामा का एल्बम सबको पीछे छोड़कर विजेता बना।

यह एल्बम कई सालों में रिकॉर्ड किए गए #दलाई लामा के विचारों का संग्रह है। इसमें माइंडफुलनेस, करुणा, सद्भाव, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर उनके विचार शामिल हैं। एल्बम को हिंदुस्तानी क्लासिकल म्यूजिक की जड़ों से प्रेरित इनोवेटिव म्यूजिकल एलिमेंट्स के साथ ब्लेंड किया गया है, जो इसे एक अनोखा स्पोकेन-वर्ड प्रोजेक्ट बनाता है। यह सिर्फ ऑडियोबुक नहीं, बल्कि ध्यान और शांति का एक संगीतमय अनुभव है।
दलाई लामा की प्रतिक्रिया: व्यक्तिगत नहीं, मानवता के लिए
अवॉर्ड मिलने पर दलाई लामा ने कहा, “यह मान्यता व्यक्तिगत उपलब्धि के बारे में नहीं है, बल्कि मानवता के प्रति साझा जिम्मेदारी के बारे में है।” उन्होंने आगे कहा कि दुनिया के 8 अरब लोगों के कल्याण के लिए शांति, करुणा, पर्यावरण की देखभाल और वैश्विक एकता बहुत जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह ग्रैमी उनके इन संदेशों को और दूर तक पहुंचाने में मदद करेगा।
दलाई लामा का जीवन और संघर्ष
- 90 साल के #दलाई लामा (14वें दलाई लामा) का जीवन संघर्ष और शांति का प्रतीक है।
- 66 साल पहले, 1959 में चीन की दमनकारी कार्रवाई के बाद वे तिब्बत से भागकर भारत आए थे।
- नोरबुलिंगका पैलेस से सैनिक के भेष में 14 दिनों की खतरनाक यात्रा के बाद वे मुसूरी पहुंचे
- और बाद में धर्मशाला में बस गए, जो आज तिब्बती निर्वासित सरकार का केंद्र है।
- भारत में रहते हुए उन्होंने मानव मूल्यों, अंतरधार्मिक सद्भाव और तिब्बती भाषा-संस्कृति
- के संरक्षण के लिए काम किया। आज भारत में करीब 1 लाख तिब्बती रहते हैं।
यह ग्रैमी जीत उनके लंबे सफर में एक नया अध्याय जोड़ती है। पहले नोबेल शांति पुरस्कार, अब ग्रैमी – यह दिखाता है कि उनकी आवाज दुनिया में कितनी प्रभावशाली है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह जीत!
- ग्रैमी जैसे म्यूजिक अवॉर्ड में आध्यात्मिक नेता का नाम आना अनोखा है। यह दिखाता है
- कि संगीत और कहानी कहने के माध्यम से भी शांति का संदेश फैलाया जा सकता है।
- दलाई लामा का यह एल्बम लोगों को ध्यान करुणा और पर्यावरण संरक्षण की ओर प्रेरित कर रहा है।
- यह जीत न सिर्फ तिब्बती समुदाय के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है।






