डोनाल्ड ट्रंप न्यूज : हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। यह विवाद इतना गहरा हो गया कि ट्रंप ने कनाडा को अपने नए प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का दिया गया निमंत्रण वापस ले लिया। यह घटना विश्व स्तर पर सुर्खियां बटोर रही है, क्योंकि यह अमेरिका-कनाडा संबंधों में नई दरार को दर्शाती है। आइए जानते हैं पूरी कहानी, कारण और इसका वैश्विक प्रभाव क्या हो सकता है।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) दावोस में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की घोषणा की। यह एक अंतरराष्ट्रीय बोर्ड है, जिसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक संघर्षों (जैसे गाजा युद्ध) को सुलझाना, शांति स्थापित करना और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्निर्माण करना है। ट्रंप का दावा है कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र से बेहतर और सबसे प्रतिष्ठित लीडर्स का ग्रुप होगा, जिसमें वे खुद बॉस होंगे। इस बोर्ड में कई देशों को शामिल करने की योजना थी, और कनाडा को भी हाल ही में आमंत्रण मिला था। मार्क कार्नी ने इसे स्वीकार करने की तैयारी की थी, लेकिन एक भाषण ने सब बदल दिया।

मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने क्यों भड़काया ट्रंप को?
दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर मार्क कार्नी ने एक धमाकेदार भाषण दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया अब ‘नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था’ में नहीं है। बल्कि यह महाशक्तियों (great powers) के बीच प्रतिद्वंद्विता का दौर है, जहां शक्तिशाली देश आर्थिक एकीकरण, टैरिफ और सप्लाई चेन को हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं।
- कार्नी ने बिना नाम लिए ट्रंप की नीतियों पर निशाना साधा, जैसे टैरिफ युद्ध और ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्रों पर दावे।
- उन्होंने मध्यम शक्तियों (middle powers) को एकजुट होकर महाशक्तियों
- की धमकियों का विरोध करने की सलाह दी। भाषण के बाद उन्हें खड़े होकर तालियां बजीं।
- ट्रंप इसे व्यक्तिगत हमला मान बैठे। उन्होंने सोशल मीडिया (ट्रुथ सोशल) पर कनाडाई पीएम को पत्र लिखा
- “प्रिय प्रधानमंत्री कार्नी: कृपया इस पत्र को प्रमाण मानें कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कनाडा
- के शामिल होने के निमंत्रण को वापस ले रहा है। यह अब तक का सबसे प्रतिष्ठित लीडर्स बोर्ड होगा।”
ट्रंप ने पहले भी कहा था, “कनाडा अमेरिका की वजह से जीवित है। मार्क, अगली बार बयान देने से पहले इसे याद रखना।” कार्नी ने पलटवार किया: “हम कनाडाई होने की वजह से आगे बढ़ते हैं, अमेरिका के रहम पर नहीं। विविधता हमारी ताकत है।”
विवाद की जड़ें और पूर्व संदर्भ
- यह नया नहीं है। ट्रंप और कनाडा के बीच व्यापार, टैरिफ और सीमा मुद्दों पर पहले से तनाव है।
- कार्नी ने हाल ही में चीन यात्रा की और व्यापार समझौते किए, जो अमेरिका की ‘अमेरिका फर्स्ट’
- नीति से टकराते हैं। ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस अमेरिका-केंद्रित है, जबकि कार्नी का भाषण
- बहुपक्षीयता और नियम-आधारित व्यवस्था की वकालत करता है।
कुछ रिपोर्ट्स में बोर्ड के लिए 1 बिलियन डॉलर फीस का भी जिक्र है, लेकिन मुख्य कारण कार्नी का स्पीच ही माना जा रहा है।
वैश्विक प्रभाव और प्रतिक्रियाएं!
- अमेरिका-कनाडा संबंध: दोनों पड़ोसी देशों के बीच व्यापार (USMCA) प्रभावित हो सकता है।
- वैश्विक शांति प्रयास: बोर्ड ऑफ पीस की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं
- क्योंकि यह अमेरिका-विरोधी आवाजों को बाहर कर रहा है।
- दावोस फोरम: इस घटना ने WEF की बहस को और गरमा दिया, जहां महाशक्तियों
- की प्रतिस्पर्धा पर चर्चा हो रही है। कार्नी के कार्यालय ने अभी आधिकारिक टिप्पणी नहीं की
- लेकिन कनाडाई मीडिया में इसे ट्रंप की संवेदनशीलता का प्रमाण बताया जा रहा है।
ट्रंप की यह कार्रवाई दिखाती है कि वे अपनी नीतियों पर कोई आलोचना बर्दाश्त नहीं करते। क्या यह अमेरिका-कनाडा संबंधों में नई शुरुआत है या सिर्फ एक अस्थायी झगड़ा? समय बताएगा।









