महाशिवरात्रि पर देवघर : झारखंड का देवघर बैद्यनाथ धाम भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जिसे मनोकामना लिंग भी कहा जाता है। यहां सच्ची श्रद्धा से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। महाशिवरात्रि के दिन यहां लाखों श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं, क्योंकि यह शिव-पार्वती विवाह का पर्व है। बैद्यनाथ धाम की सबसे खास बात यह है कि यहां कई अनोखी परंपराएं हैं, जो अन्य शिव मंदिरों में नहीं मिलतीं। इनमें सबसे प्रमुख है मोर मुकुट चढ़ाने की परंपरा, जो विवाह बाधा निवारण के लिए बहुत प्रसिद्ध है।
बैद्यनाथ धाम का धार्मिक महत्व
देवघर को देवों की नगरी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां की मिट्टी और हवा में भगवान शिव और माता पार्वती का वास है। बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को मनोकामना लिंग के नाम से जाना जाता है। यहां पूजा-अर्चना करने से भक्तों की हर इच्छा पूरी होती है। महाशिवरात्रि पर मंदिर भव्य रूप से सजाया जाता है। चारों प्रहर विशेष पूजा होती है – प्रदोष काल, रात्रि के प्रहरों में अभिषेक, निशिता काल में विशेष आरती। भक्त दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, धतूरा, भांग और फूल चढ़ाते हैं। शिव पुराण पाठ और रुद्राभिषेक से अक्षय पुण्य मिलता है।

मोर मुकुट चढ़ाने की अनोखी परंपरा
साल में सिर्फ महाशिवरात्रि के दिन ही बैद्यनाथ धाम के शिखर (पंचशूल) पर मोर मुकुट चढ़ाया जाता है। यह परंपरा बहुत पुरानी है। जिन युवक-युवतियों की शादी में बार-बार रुकावट आ रही हो, रिश्ते बनते-बनते टूट रहे हों, विवाह में देरी हो रही हो या कुंडली में बाधाएं हों, वे इस दिन बाबा बैद्यनाथ को मोर मुकुट अर्पित करते हैं।
मान्यता है कि मोर मुकुट चढ़ाने से:
- विवाह संबंधी सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
- मनचाहा वर या वधू जल्द मिलता है।
- शादी की अड़चनें खत्म होती हैं और रिश्ता पक्का हो जाता है।
यह उपाय विशेष रूप से अविवाहितों के लिए फायदेमंद माना जाता है। तीर्थपुरोहितों के अनुसार, सच्ची श्रद्धा से यह किया जाए तो बाबा बैद्यनाथ अवश्य कृपा करते हैं।
गठबंधन परंपरा: वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए
- विवाहित जोड़ों के लिए गठबंधन परंपरा बहुत महत्वपूर्ण है। जिनके वैवाहिक जीवन में
- तनाव, मनमुटाव, कलह या अलगाव की स्थिति आ गई हो, वे महाशिवरात्रि पर मंदिर में गठबंधन करते हैं।
- इसमें पति-पत्नी एक-दूसरे के हाथ में गठरी (लाल धागा या गठरी) बांधते हैं और शिव-पार्वती से प्रार्थना करते हैं।
लाभ:
- रिश्ते में मधुरता आती है।
- आपसी प्रेम और समझ बढ़ती है।
- वैवाहिक सुख-शांति बनी रहती है।
- तनाव और कलह दूर होते हैं।
यह परंपरा भी केवल देवघर बैद्यनाथ धाम में ही निभाई जाती है।
महाशिवरात्रि पर अन्य उपाय और पूजा विधि
- षोडशोपचार अभिषेक: तीर्थपुरोहित विधि-विधान से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।
- चढ़ावा: दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, धतूरा, भांग, फूल।
- पाठ और जाप: शिव पुराण पाठ, रुद्राभिषेक, “ॐ नमः शिवाय” जाप।
- दान-पुण्य: इस दिन दान करने से अक्षय पुण्य मिलता है।
महाशिवरात्रि पर देवघर पहुंचकर ये उपाय करने से विवाह बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। यदि आपकी शादी में कोई समस्या है, तो इस पर्व पर बैद्यनाथ धाम जाएं और मोर मुकुट या गठबंधन करवाएं। बाबा बैद्यनाथ की कृपा से मनोकामनाएं जरूर पूरी होंगी!









