भाजपा की वित्तीय रिपोर्ट : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को अपनी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट सौंपी है। यह रिपोर्ट वित्त वर्ष 2024-25 की है, जिसमें पार्टी की आय, खर्च और संपत्ति का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद यह रिपोर्ट काफी चर्चा में है, क्योंकि इसमें भाजपा की मजबूत वित्तीय स्थिति का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने पिछले साल की तुलना में काफी अधिक चंदा जुटाया और चुनाव प्रचार पर भारी खर्च किया।
भाजपा को मिला कितना चंदा?
रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा चंदे की राशि से जुड़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 में भाजपा को चंदे के रूप में 6,125 करोड़ रुपये मिले। यह पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के 3,967 करोड़ रुपये से काफी अधिक है। चंदे में करीब 54% की बढ़ोतरी हुई है।

इसके अलावा, पार्टी के पास 9,390 करोड़ रुपये की सावधि जमा है। बैंकों से 634 करोड़ रुपये का ब्याज प्राप्त हुआ। पार्टी ने आयकर रिफंड के रूप में 65.92 करोड़ रुपये दाखिल किया, जिस पर 4.40 करोड़ रुपये का ब्याज मिला। कुल मिलाकर, 31 मार्च 2025 तक पार्टी के ‘जनरल फंड’ में 12,164 करोड़ रुपये पहुंच गए, जो पिछले साल 9,169 करोड़ रुपये था। यानी एक साल में 2,882 करोड़ रुपये की शुद्ध वृद्धि हुई।
रिपोर्ट से साफ है कि भाजपा की वित्तीय स्थिति बेहद मजबूत है। पार्टी के पास लगभग 10,000 करोड़ रुपये की नकदी और जमा राशि है।
चुनाव प्रचार पर कितना खर्च?
2024 के लोकसभा चुनावों और कुछ विधानसभा चुनावों में भाजपा ने प्रचार पर भारी खर्च किया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में चुनाव प्रचार खर्च 3,335.36 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल के 1,754 करोड़ रुपये से लगभग दोगुना है। कुल खर्च का 88.36% सिर्फ चुनाव प्रचार पर गया।
खर्च का ब्रेकअप कुछ इस प्रकार है:
- उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता: 312.9 करोड़ रुपये
- हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर यात्राओं पर: 583 करोड़ रुपये
- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर विज्ञापन: 1,125 करोड़ रुपये
- कटआउट, होर्डिंग्स और बैनर: 107 करोड़ रुपये
- अन्य विज्ञापनों पर: 897 करोड़ रुपये
- रैलियों और अभियानों पर: 90.93 करोड़ रुपये
- बैठकों पर: 51.72 करोड़ रुपये
यह खर्च दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) और ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) को सत्ता से हटाने के बाद बढ़ा। भाजपा ने बड़े पैमाने पर मीडिया और डिजिटल अभियान चलाए, जिससे पार्टी की पहुंच बढ़ी।
क्या नहीं खुलासा हुआ?
- रिपोर्ट में चंदे की कुल राशि, जमा, ब्याज और खर्च का ब्योरा तो है, लेकिन दानदाताओं के नाम
- इलेक्टोरल बॉन्ड्स की जानकारी या अन्य स्रोतों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
- यह राजनीतिक दलों की पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर बहस का विषय बना हुआ है।
- विपक्षी दल अक्सर इस बात पर सवाल उठाते हैं कि इतना बड़ा चंदा कहां से आता है।
भाजपा की वित्तीय ताकत क्यों महत्वपूर्ण?
- भाजपा की यह रिपोर्ट दर्शाती है कि पार्टी चुनावी लड़ाई में आर्थिक रूप से सबसे मजबूत है।
- 2024 लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 240 सीटें जीतीं और NDA गठबंधन ने सरकार बनाई।
- इतने बड़े फंड से पार्टी ने बड़े अभियान चलाए, जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ा।
नए भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी (जिन्हें हाल ही में पदभार मिला) के पास अब इस विशाल धनराशि का प्रबंधन होगा। पार्टी इसे संगठन मजबूत करने, भविष्य के चुनावों और सामाजिक कार्यों में इस्तेमाल कर सकती है।
भाजपा की चुनाव आयोग को सौंपी रिपोर्ट से पार्टी की आर्थिक ताकत का स्पष्ट अंदाजा मिलता है। 6,125 करोड़ का चंदा और 3,335 करोड़ का चुनाव खर्च भाजपा की रणनीति को मजबूत बनाता है। हालांकि, दानदाताओं की जानकारी न होने से पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। यह रिपोर्ट राजनीतिक दलों के फंडिंग मॉडल पर नई बहस छेड़ सकती है।









