अखिलेश यादव : उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक बवाल मचा हुआ है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 3 फरवरी 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा और चुनाव आयोग पर बड़े आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि SIR के जरिए बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही है, खासकर फॉर्म-7 का दुरुपयोग करके पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और मुस्लिम समाज के वोट काटे जा रहे हैं। अखिलेश ने मांग की कि अब तक जमा सभी फॉर्म-7 रद्द किए जाएं और फॉर्म पर चुनाव आयोग का होलोग्राम अनिवार्य हो।
यूपी SIR क्या है और फॉर्म-7 की भूमिका
SIR मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन है, जिसमें घर-घर जाकर वोटरों की जांच होती है। इसमें नाम जुड़ने (फॉर्म-6), संशोधन (फॉर्म-8) और नाम कटवाने/आपत्ति दर्ज करने के लिए फॉर्म-7 इस्तेमाल होता है। फॉर्म-7 पर कोई भी व्यक्ति किसी अन्य वोटर के नाम पर आपत्ति दर्ज कर सकता है, जैसे मृत्यु, स्थानांतरण या गलत नाम होने पर। लेकिन अखिलेश का आरोप है कि भाजपा इस फॉर्म का गलत इस्तेमाल कर रही है।

उन्होंने कहा, “प्रदेश में 1 करोड़ 99 हजार 710 वोट काटने की तैयारी है। हर विधानसभा में 10 हजार वोट कटवाने का टारगेट है।” अखिलेश ने दावा किया कि चुनाव आयोग से मिलकर भाजपा ने लाखों फॉर्म-7 छपवाए हैं, जिनमें फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे लगाकर जमा किए जा रहे हैं।
सीतापुर से शुरू हुआ खेल, अब पूरे यूपी में फैला
- अखिलेश ने सबसे पहले सीतापुर का उदाहरण दिया, जहां शिकायतकर्ता लिख नहीं सकता था
- अंगूठा लगाता था लेकिन फॉर्म पर हस्ताक्षर थे। इसी तरह सुल्तानपुर, कन्नौज, लखनऊ
- सरोजनीनगर और अन्य जिलों में मामला सामने आया। सरोजनीनगर में 100 से ज्यादा फॉर्म पर
- एक ही व्यक्ति ‘दशरथ’ के हस्ताक्षर थे। पूर्व मंत्री योगेश के क्षेत्र में 6321 वोट काटने की तैयारी बताई गई।
अखिलेश ने कहा, “भाजपा ने फॉर्म-7 को हथियार बना लिया है। पीडीए खासकर मुस्लिम समाज के लोगों को टारगेट किया जा रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि आईएएस अफसर सीएम ऑफिस में बैठकर बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को धमका रहे हैं। मतदाताओं को सही वोटर लिस्ट नहीं दिखाई जा रही, बल्कि पंचायत चुनाव की लिस्ट दिखा दी जाती है।
चुनाव आयोग और भाजपा पर गंभीर आरोप
- सपा ने चुनाव आयोग से शिकायत की है। अखिलेश ने मांग की कि गड़बड़ी
- करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो, क्योंकि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम
- के तहत गलत फॉर्म जमा करना अपराध है। उन्होंने कहा, “फॉर्म-7 कागजी फॉर्मेट नहीं होना चाहिए।
- नंबरिंग और होलोग्राम वाला एक ही फॉर्म हो। अब तक के सभी जमा फॉर्म रद्द हों।”
अखिलेश ने चेतावनी दी कि यह लोकतंत्र पर हमला है। “वन नेशन वन इलेक्शन की तरफ जा रहे हैं, पता नहीं कहां पहुंच जाएंगे?” उन्होंने पीडीए प्रहरियों से अपील की कि एक भी वोट कटने न दें और मतदाताओं से नाम वेरिफाई करवाएं।
राजनीतिक मायने और विपक्ष की रणनीति
- यह हमला ऐसे समय में है जब 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।
- अखिलेश का दावा है कि भाजपा हार के डर से वोट चोरी की साजिश रच रही है।
- सपा इसे महाघोटाला बता रही है और मीडिया-कोर्ट से जांच की अपील कर रही है।
- वहीं, भाजपा पक्ष से अभी स्पष्ट जवाब नहीं आया, लेकिन पहले योगी सरकार ने कहा था
- कि ज्यादातर कटे नाम भाजपा के वोटरों के हैं।








