पाकिस्तान की सेना : बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत, लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन और हिंसा का गवाह रहा है। हाल के वर्षों में यहां की स्थिति और गंभीर हो गई है, खासकर जब बलूच महिलाएं भी हथियार उठाकर पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ाई में शामिल हो रही हैं। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा जारी तस्वीरों और वीडियो में महिला फिदायीन और लड़ाकों की भूमिका ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। लेकिन सवाल यह है कि बलूच महिलाएं AK-47 क्यों थाम रही हैं? आइए जानते हैं इसकी पूरी अंदरूनी कहानी।

बलूचिस्तान में विद्रोह की जड़ें

बलूचिस्तान प्रांत में संसाधनों से भरपूर होने के बावजूद स्थानीय बलूच लोगों को विकास का लाभ नहीं मिलता। प्राकृतिक गैस, खनिज और ग्वादर पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स से पाकिस्तान को फायदा होता है, लेकिन बलूचों को नजरअंदाज किया जाता है। जबरन गुमशुदगियां (Enforced Disappearances), अत्याचार और राजनीतिक दमन ने असंतोष को जन्म दिया। Voice for Baloch Missing Persons के अनुसार, 2000 के बाद से 5000 से ज्यादा लोग लापता हैं, जिनमें ज्यादातर युवा पुरुष हैं। इन परिवारों में महिलाएं अब चुप नहीं बैठी हैं।

पाकिस्तान की सेना
पाकिस्तान की सेना

महिलाओं की बढ़ती भूमिका: एक सामाजिक बदलाव

पहले बलूच विद्रोह मुख्य रूप से जनजातीय सरदारों और पुरुषों तक सीमित था, लेकिन अब यह शिक्षित मध्यम वर्ग और महिलाओं तक पहुंच गया है। विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कठोर कार्रवाइयों ने समाज में गहरा गुस्सा पैदा किया है। जब पुरुष लापता या मारे जाते हैं, तो महिलाएं घर की जिम्मेदारी के साथ-साथ प्रतिरोध की जिम्मेदारी भी उठाती हैं।

पहली महिला फिदायीन से अब तक का सफर

यह कोई नई बात नहीं है। 2022 में कराची यूनिवर्सिटी के कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट पर हमले में पहली महिला फिदायीन सामने आई थी, जिसमें चीनी नागरिक भी मारे गए। इसके बाद 2022, 2024 और 2025 में कई घटनाएं हुईं, जैसे महल बलूच, महिकन बलूच आदि। मार्च 2025 में कलात में पैरामिलिट्री काफिले पर हमला भी महिला ने किया। अब 2026 में महिलाओं की संख्या और बढ़ गई है। BLA के अनुसार, 3000 से ज्यादा लड़ाके ऑपरेशन में शामिल हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है।

क्यों महिलाएं आगे आ रही हैं?

विश्लेषक आयशा सिद्दीका कहती हैं कि महिलाओं की सक्रियता समाज में गहरे गुस्से का संकेत है। ब्रह्मा चेलानी जैसे जानकार इसे गहरी निराशा का परिणाम बताते हैं। हालांकि पाकिस्तानी पक्ष इसे उग्रवादियों द्वारा महिलाओं का शोषण बताता है।

पाकिस्तान के लिए चुनौती

बलूचिस्तान में 2011 से अब तक 350 से ज्यादा मौतें उग्रवाद से जुड़ी हैं। 2024-2026 में हिंसा बढ़ी है। महिला फिदायीनों की भूमिका से सुरक्षा बलों की चुनौतियां बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री सरफराज बुगती व्यथित नजर आए, और धारा 144 लगाई गई।

बलूच महिलाओं का AK-47 उठाना सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि आजादी, सम्मान और न्याय की लड़ाई है। यह बलूच समाज में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है। क्या यह विद्रोह और तेज होगा या दब जाएगा? समय बताएगा। लेकिन फिलहाल, बलूच महिलाएं इतिहास रच रही हैं।

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