मुंबई BMC चुनाव : महाराष्ट्र की स्थानीय निकाय चुनावों में मुंबई बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) हमेशा से सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित रहती है। 15 जनवरी 2026 को हुए इन चुनावों के परिणाम और रुझानों ने राज्य की राजनीति में बड़े उलटफेर के संकेत दिए हैं। जहां एक तरफ कांग्रेस को मुंबई में करारी हार का सामना करना पड़ा, वहीं राज्य के अन्य हिस्सों में उसका अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसे क्षेत्रीय दिग्गजों के लिए चिंता का सबब बन गया है।
मुंबई में कांग्रेस की खराब स्थिति
BMC में कुल 227 वार्ड हैं। मतगणना के शुरुआती रुझानों और विभिन्न एग्जिट पोल के अनुसार महायुति गठबंधन (BJP + शिवसेना शिंदे गुट) ने मजबूत बढ़त बनाई है। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है, जबकि शिवसेना (UBT) और मनसे का गठबंधन दूसरे स्थान पर है। लेकिन कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। मुंबई में कांग्रेस को महज 5 से 23 सीटों (विभिन्न रुझानों के अनुसार) तक ही सीमित रहना पड़ा। यह संख्या पार्टी के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी होने के साथ-साथ राजनीतिक प्रभाव का भी बड़ा केंद्र है।

पुणे जैसे अन्य प्रमुख शहर में भी कांग्रेस का हाल लगभग वैसा ही रहा, जहां वह सिर्फ 5 सीटों पर सिमट गई। पिंपरी-चिंचवड़, वसई-विरार, कल्याण-डोंबिवली, ठाणे, नवी मुंबई जैसे इलाकों में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला या बेहद कम सीटें मिलीं। यह स्थिति पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की कमजोरी और क्षेत्रीय दलों की मजबूत जड़ों को साफ तौर पर उजागर करती है।
राज्य स्तर पर कांग्रेस की मजबूत स्थिति
- मुंबई में फ्लॉप शो के बावजूद महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के कुल रुझानों में कांग्रेस ने 171 सीटों
- के साथ तीसरी सबसे बड़ी ताकत के रूप में जगह बनाई है। यह आंकड़ा शिवसेना (शिंदे गुट)
- की 213 सीटों से कम तो है, लेकिन उद्धव ठाकरे के शिवसेना (UBT)
- और शरद पवार के एनसीपी गुट से काफी आगे है।
कांग्रेस ने लातूर (21 वार्ड), अमरावती (13), चंद्रपुर (12), भिवंडी (12), नागपुर (दूसरा स्थान), कोल्हापुर और अकोला जैसे क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया। ग्रामीण और छोटे शहरों में पार्टी ने अपनी पकड़ मजबूत दिखाई, जबकि बड़े महानगरों में संघर्ष किया।
ठाकरे और पवार के लिए बढ़ी चुनौती
- यह परिणाम उद्धव ठाकरे और शरद पवार के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
- मुंबई में शिवसेना (UBT) को मजबूत प्रदर्शन के बावजूद राज्य के अन्य हिस्सों में उनकी
- स्थिति कमजोर हुई है। शरद पवार का गुट भी अजीत पवार के प्रभाव से काफी पीछे दिख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का राज्य स्तर पर उभार महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन में असंतुलन पैदा कर सकता है। जहां पहले ठाकरे और पवार परिवार क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत माने जाते थे, अब कांग्रेस की बढ़ती ताकत उनके प्रभाव को चुनौती दे रही है। भाजपा की राज्यव्यापी जीत के बीच कांग्रेस का यह प्रदर्शन विपक्षी एकता के लिए नई चुनौती है।
महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक तस्वीर
- BMC चुनाव में कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन उसके मुंबई में संगठन को मजबूत करने की
- जरूरत को दर्शाता है। लेकिन राज्य स्तर पर तीसरे नंबर पर पहुंचना यह संकेत देता है
- कि कांग्रेस धीरे-धीरे महाराष्ट्र में वापसी कर रही है।
- आने वाले दिनों में ठाकरे और पवार परिवारों को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।
यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण की शुरुआत साबित हो सकता है। क्या कांग्रेस MVA में प्रमुख भूमिका निभाएगी या क्षेत्रीय दल फिर से हावी होंगे? समय ही बताएगा।









