टीसीएस की अमेरिका : भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने H-1B वीजा पर बढ़ती निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी अमेरिका में अगले 3 से 5 साल में करीब 15,000 लोगों को लोकल (स्थानीय) आधार पर हायर करने की योजना पर तेजी से आगे बढ़ रही है। यह फैसला अमेरिकी सरकार द्वारा प्रस्तावित $100,000 की नई H-1B वीजा फीस (फरवरी 2026 से लागू) और बदलते इमिग्रेशन नियमों के बीच आया है। TCS CEO के. कृतिवासन और CHRO सुदीप कुन्नुमल ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में इसकी पुष्टि की।

टीसीएस की अमेरिका H-1B वीजा पर TCS की नई रणनीति

पिछले कुछ सालों में TCS ने अमेरिका में मजबूत लोकल एम्प्लॉयर ब्रांड बनाया है। कंपनी ने कहा कि वर्तमान तिमाही में अधिकांश जरूरतें लोकल हायरिंग से पूरी की गईं, जिससे H-1B पर निर्भरता काफी कम हुई।

टीसीएस की अमेरिका
टीसीएस की अमेरिका

CEO कृतिवासन ने कहा, “हमने कई सालों से लोकल एम्प्लॉयर ब्रांड बनाया है। इस तिमाही में ज्यादातर रिक्वायरमेंट्स लोकल हायरिंग से पूरी हुईं।”

TCS की अमेरिका हायरिंग प्लान और AI ग्रोथ

लोकलाइजेशन के फायदे और चुनौतियां

भविष्य का आउटलुक

TCS की यह स्ट्रैटेजी भारतीय आईटी इंडस्ट्री के लिए मिसाल है। H-1B पर निर्भरता कम करके

लोकल टैलेंट पर फोकस से कंपनी लंबे समय तक मजबूत रहेगी।

अगर आप आईटी सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं, तो TCS जैसी कंपनियां अपस्किलिंग और लोकल ऑपर्चुनिटीज पर जोर दे रही हैं।

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