वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण : लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया। यह सर्वेक्षण यूनियन बजट 2026-27 से ठीक पहले आता है और देश की आर्थिक स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण देता है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन और उनकी टीम द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में भारत की मजबूत आर्थिक नींव और सुधारों पर जोर दिया गया है।
मुख्य हाइलाइट्स: जीडीपी ग्रोथ प्रोजेक्शन क्या है?
सर्वेक्षण के अनुसार:
- वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ का पहला अग्रिम अनुमान 7.4% है।
- ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) ग्रोथ 7.3% अनुमानित है।
- वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने की उम्मीद है।
यह अनुमान भारत को दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाए रखता है – लगातार चौथा साल। पिछले वर्षों की तुलना में यह मजबूत मोमेंटम दिखाता है:

- FY25 में ग्रोथ 6.5% थी।
- कोविड से पहले (FY12-FY20) औसत 6.4% था।
- अब पोटेंशियल ग्रोथ रेट 7% के आसपास रिवाइज किया गया है (पहले 6.5% था)।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अनुमान थोड़े कम हैं:
- IMF: FY26 में 7.3%, FY27 में 6.4%।
- World Bank: FY26 में 7.2%, FY27 में 6.5%।
आर्थिक प्रदर्शन की मजबूत नींव: क्या कहता है सर्वेक्षण?
भारत ने ग्लोबल अनिश्चितताओं (जियोपॉलिटिकल टेंशन, ट्रेड फ्रैगमेंटेशन, फाइनेंशियल वल्नरेबिलिटी) के बावजूद मजबूत प्रदर्शन किया है। मुख्य ड्राइवर्स:
- मजबूत घरेलू मांग (प्राइवेट कंजम्पशन)।
- निवेश में तेजी (GFCF ग्रोथ 7.8% अनुमानित)।
- फिस्कल कंसॉलिडेशन और मैक्रो स्टेबिलिटी।
- रेगुलेटरी रिफॉर्म्स जैसे इनकम टैक्स राहत, GST सुधार, नया डायरेक्ट टैक्स लॉ (अप्रैल से प्रभावी), FDI और इनसॉल्वेंसी फ्रेमवर्क में बदलाव।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था “स्टीडी ग्रोथ” के दौर में है – सावधानी जरूरी लेकिन निराशावाद नहीं।
चुनौतियां और जोखिम क्या हैं?
- ग्लोबल ट्रेड प्रेशर, टैरिफ (ट्रंप पॉलिसी का जिक्र), जियोपॉलिटिकल टेंशन।
- एआई और टेक्नोलॉजी से लेबर मार्केट पर असर – ‘एआई बबल’ का खतरा।
- एक्सपोर्ट में कमजोरी, लेकिन डाइवर्सिफिकेशन और सेल्फ-रिलायंस पर फोकस।
- इन्फ्लेशन: RBI अनुमान के मुताबिक सालाना 2% (फूड प्राइस गिरने से), जो 4% टारगेट से नीचे। दिसंबर क्वार्टर 0.6%, मार्च 2.9%।
सेक्टर-वाइज फोकस और रेकमेंडेशन्स
- मैन्युफैक्चरिंग: प्रोडक्ट क्वालिटी सुधार, डीप इकोनॉमिक पार्टनरशिप, सेमीकंडक्टर में सेल्फ-रिलायंस।
- प्राइवेट सेक्टर: निवेश और जॉब क्रिएशन पर जोर, खासकर AI प्रभाव से।
- इंफ्रास्ट्रक्चर: पब्लिक एक्सपेंडिचर पर निर्भरता कम करें, प्राइवेट पार्टिसिपेशन बढ़ाएं। कैपिटल एक्सपेंडिचर FY22 में 5.93 लाख करोड़ से FY26 में 11.21 लाख करोड़ हो गया।
- एआई पर स्पेशल चैप्टर: पहली बार अलग से, नई टेक्नोलॉजी पर फोकस।
- इंक्लूसिव डेवलपमेंट: किसान, MSME, युवा रोजगार पर ध्यान।
2047 तक विकसित भारत का रोडमैप
आर्थिक सर्वेक्षण 2026 भारत की मजबूती और आत्मविश्वास को दर्शाता है। मजबूत मैक्रो फंडामेंटल्स, रिफॉर्म्स और घरेलू मांग से ग्रोथ मोमेंटम बरकरार रहेगा। ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच भारत रणनीतिक रेजिलिएंस बना रहा है। 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले बजट में इन सुझावों का असर दिखेगा।
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