फ्रांस : 20 जनवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा ट्विस्ट देखने को मिला। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में शांति स्थापित करने के लिए बोर्ड ऑफ पीस (Board of Peace) का प्रस्ताव रखा है, लेकिन इसकी शुरुआत ही विवादास्पद हो गई। फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों ने इसमें शामिल होने से इनकार करने की तैयारी कर ली है। ट्रंप ने इसे लेकर फ्रांस की वाइन और शैंपेन पर 200% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। लाइव हिंदुस्तान और ब्लूमबर्ग जैसी रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह खबर दावोस समिट से पहले सामने आई है। आइए जानते हैं पूरी कहानी, कारण, ट्रंप का रिएक्शन और भारत का क्या प्लान है।
ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस क्या है?
ट्रंप ने पिछले साल सितंबर में गाजा युद्ध खत्म करने के लिए बोर्ड ऑफ पीस का आइडिया दिया था। यह बोर्ड गाजा में पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण और स्थायी शांति के लिए काम करेगा। लेकिन चार्टर के मुताबिक, यह सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं – वैश्विक संघर्षों के समाधान में भी भूमिका निभाएगा। ट्रंप इसे UNSC (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) का विकल्प या सप्लीमेंट बताते हैं।

ट्रंप ने करीब 60 देशों को निमंत्रण भेजा, जिसमें रूस (पुतिन), बेलारूस, पाकिस्तान, मिस्र, जॉर्डन, तुर्की, ग्रीस, वियतनाम आदि शामिल हैं। सदस्यता के लिए 1 बिलियन डॉलर की फीस भी लगाई गई है। दावोस में गुरुवार को इस पर साइनिंग का प्लान है। हंगरी एकमात्र यूरोपीय देश है जिसने अभी तक हामी भरी है।
मैक्रों क्यों इनकार कर रहे हैं?
फ्रांस के सूत्रों के अनुसार, मैक्रों इस बोर्ड में शामिल नहीं होंगे। मुख्य कारण:
- बोर्ड का चार्टर गाजा से आगे जाता है, जो UN के सिद्धांतों और ढांचे पर सवाल उठाता है।
- UNSC को चुनौती देने जैसा लगता है, जबकि फ्रांस UNSC का स्थायी सदस्य है।
- 1 बिलियन डॉलर फीस और ट्रंप की एकतरफा लीडरशिप पर आपत्ति।
- फ्रांस की विदेश नीति में UN को सर्वोच्च महत्व, इसे कमजोर नहीं करना चाहते।
फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि प्रस्ताव की जांच हो रही है, लेकिन “सकारात्मक जवाब” की संभावना नहीं। मैक्रों के करीबी सूत्र ने कहा, “टैरिफ की धमकी से विदेश नीति प्रभावित नहीं होगी – यह अस्वीकार्य और बेअसर है।”
ट्रंप का गुस्सा और धमकी
ट्रंप ने मैक्रों को लेकर तीखी टिप्पणी की: “कोई उन्हें नहीं चाहता क्योंकि वह जल्द ही ऑफिस से बाहर हो रहे हैं।” उन्होंने कहा, “मैं उनकी वाइन्स और शैंपेन पर 200% टैरिफ लगाऊंगा, फिर देखना वह शामिल हो जाएंगे।” ट्रंप ने मैक्रों का प्राइवेट टेक्स्ट भी ट्रुथ सोशल पर शेयर किया, जिसमें मैक्रों ने दावोस के बाद पेरिस में डिनर और G7 मीटिंग का प्रस्ताव दिया था (यूक्रेन, डेनमार्क, सीरिया, रूस को शामिल करने का)। ट्रंप ने पुतिन को भी निमंत्रण की पुष्टि की।
भारत का क्या प्लान?
ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बोर्ड में शामिल होने के लिए पत्र लिखा। अमेरिकी राजदूत ने इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया। भारत ने अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी। सूत्रों के अनुसार, निमंत्रण का अध्ययन चल रहा है और अगले कुछ दिनों में फैसला लिया जाएगा। भारत गाजा में शांति और दो-राज्य समाधान का समर्थक है, लेकिन UN फ्रेमवर्क को प्राथमिकता देता है।
अंतरराष्ट्रीय रिएक्शन और प्रभाव!
- यूरोप में विभाजन: ज्यादातर देश चुप, लेकिन मैक्रों के फैसले से प्रभाव पड़ सकता है।
- इजराइल ने भी आलोचना की, रूस ने प्रस्ताव का अध्ययन शुरू किया।
- यह ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा लगता है, लेकिन UN को चुनौती देने से विवाद बढ़ सकता है।
- गाजा में युद्ध जारी, मानवीय संकट गहरा – बोर्ड की सफलता संदिग्ध।







