मकर संक्रांति : उत्तर भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जो फसल, सूर्य देव की पूजा और नई शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन 14 जनवरी 2026 को बुधवार को मनाया जाएगा। दोपहर 3:13 बजे सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे पुण्यकाल शुरू होगा। राजस्थान में यह त्योहार सिर्फ पतंगबाजी और तिल-गुड़ से नहीं, बल्कि परिवारिक रिश्तों को मजबूत करने वाली अनोखी और पौराणिक परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। खासकर बहुएं इस दिन कई रस्में निभाती हैं, जो सास-ससुर और देवर-भाभी के रिश्ते में मिठास और सम्मान लाती हैं।

मकर संक्रांति का महत्व राजस्थान में

राजस्थान में मकर संक्रांति को उत्तरायण के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है। सूर्य की दिशा उत्तर की ओर होने से यह दिन शुभ माना जाता है। लोग स्नान-दान करते हैं, तिल, गुड़, कंबल, अनाज आदि का दान करते हैं। जोधपुर और मारवाड़ क्षेत्र में यह त्योहार लोहड़ी के साथ भी जुड़ा होता है, जहां अलाव जलाकर तिल-मूंगफली अर्पित की जाती है। लेकिन सबसे खास हैं बहुओं की पारंपरिक रस्में, जो परिवार में सौहार्द और खुशहाली का संदेश देती हैं।

मकर संक्रांति
मकर संक्रांति

बहुओं द्वारा निभाई जाने वाली प्रमुख परंपराएं

सास को सीढ़ियों से उतारना और ससुर को जगाना राजस्थान की कई जगहों पर नवविवाहिता बहुएं इस दिन सास-ससुर के लिए विशेष नेगचार करती हैं।

देवर को घेवर खिलाना मकर संक्रांति का सबसे स्वादिष्ट और भावुक हिस्सा है घेवर। बहू इस दिन देवर को हाथ से घेवर खिलाती है। यह रस्म देवर-भाभी के प्यार और भाई-बहन जैसे रिश्ते को मजबूत करती है। घेवर राजस्थान का पारंपरिक मिठाई है, जो केसर, घी और चाशनी से बनता है। इसे खिलाने से परिवार में खुशियां बनी रहती हैं।

अन्य रस्में और नेगचार

    मकर संक्रांति के पारंपरिक व्यंजन

    इस दिन घरों में राजस्थानी स्वाद का मेला लगता है। प्रमुख व्यंजन हैं:

    ये व्यंजन ठंड में गर्माहट देते हैं और पोषण से भरपूर होते हैं।