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मौनी अमावस्या 2026 तिथि, मुहूर्त, स्नान-दान, पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व!

On: January 17, 2026 7:54 AM
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मौनी अमावस्या 2026

मौनी अमावस्या 2026 : हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष स्थान है, लेकिन माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या या माघी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह सबसे पवित्र और पुण्यदायी अमावस्या मानी जाती है। इस दिन मौन व्रत, पवित्र स्नान, दान-पुण्य और पितृ तर्पण करने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और पितरों को शांति प्राप्त होती है।

मौनी अमावस्या 2026 कब है? (Mauni Amavasya 2026 Date)

वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 18 जनवरी की मध्यरात्रि 12:03 बजे से शुरू होकर 19 जनवरी की मध्यरात्रि 1:21 बजे तक रहेगी। उदय तिथि के आधार पर स्नान-दान और मुख्य अनुष्ठान 18 जनवरी को ही किए जाएंगे।

इस बार यह रविवार को पड़ रही है, जिसे रवि मौनी अमावस्या कहा जाता है। यह संयोग सूर्य की कृपा से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और पाप नाश के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

मौनी अमावस्या 2026
मौनी अमावस्या 2026

मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व (Spiritual Significance)

सनातन परंपरा में माघ अमावस्या को मौनी अमावस्या इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन मौन रहकर साधना करने से विशेष पुण्य मिलता है। मौन से मन शांत होता है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

  • पितृ दोष निवारण के लिए यह दिन सर्वोत्तम है। पितरों का तर्पण, पिंडदान
  • और श्राद्ध करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और वंश को आशीर्वाद देते हैं।
  • प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान का महत्व कुंभ मेले के मुख्य स्नान के समान होता है।
  • मान्यता है कि इस दिन गंगा का जल अमृत तुल्य हो जाता है। स्नान मात्र से तन-मन के पाप धुल जाते हैं।
  • यह दिन मोक्ष प्राप्ति, आत्मशुद्धि और पारिवारिक सुख-शांति के लिए अत्यंत फलदायी है।

स्नान-दान का शुभ मुहूर्त (Snan Daan Muhurat 2026)

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान सबसे उत्तम माना जाता है – सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक।
  • पूरे दिन (18 जनवरी सुबह से शाम तक) पवित्र नदियों या घर पर स्नान किया जा सकता है।
  • स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें, लाल फूल और अक्षत चढ़ाएं।
  • इससे स्वास्थ्य मजबूत होता है और आत्मबल बढ़ता है।
  • अभिजीत मुहूर्त में पितृ तर्पण करना विशेष शुभ होता है।

मौनी अमावस्या पूजा विधि और व्रत नियम (Puja Vidhi & Vrat Niyam)

  1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  2. स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल पर बैठें।
  3. सूर्य को जल अर्पित करें, गंगा जल का छिड़काव करें।
  4. मौन व्रत रखें – पूरे दिन कम से कम बोलें या पूरी तरह मौन रहें। इससे एकाग्रता बढ़ती है।
  5. पितरों के लिए तर्पण करें – काले तिल, जल, कुश और पिंड अर्पित करें।
  6. दान दें – कंबल, जूते, अन्न, तिल, उड़द आदि गरीबों को दें।
  7. भगवान विष्णु या शिव की पूजा करें, मंत्र जप करें।
  8. व्रत शाम को फलाहार या एक समय भोजन के साथ पूरा करें।

मौन व्रत के नियम – अनावश्यक बातचीत से बचें, क्रोध न करें, सकारात्मक विचार रखें।

मौनी अमावस्या के लाभ और उपाय

इस दिन किए गए कार्य अक्षय पुण्य देते हैं। पितृ दोष, कालसर्प दोष और अन्य ग्रह बाधाओं से मुक्ति मिलती है। संगम स्नान से कई जन्मों के पाप कट जाते हैं।

यदि आप प्रयागराज नहीं जा सकते, तो घर पर ही गंगाजल से स्नान करें और पितरों को याद कर जल अर्पित करें।

निष्कर्ष मौनी अमावस्या 2026 एक ऐसा अवसर है जब आत्मा की शुद्धि, पितरों की शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का सुनहरा मौका मिलता है। इस पावन दिन स्नान, दान, मौन और तर्पण अवश्य करें। इससे न केवल आपके पूर्वज प्रसन्न होंगे, बल्कि आपका जीवन भी सुख-शांति और समृद्धि से भर जाएगा।

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