MCX फ्यूचर्स प्राइस : 31 जनवरी 2026 को सर्राफा बाजार में हाहाकार मच गया। MCX पर चांदी की कीमतों में एक दिन में ही 1 लाख रुपये से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि सोना भी 33,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक लुढ़क गया। यह गिरावट ऐतिहासिक स्तर की है, जहां चांदी अपने रिकॉर्ड हाई से 1,28,126 रुपये और सोना 42,247 रुपये नीचे आ गया। निवेशकों के लिए यह दिन यादगार रहा, क्योंकि हाल के रिकॉर्ड हाई के बाद अचानक मुनाफावसूली और वैश्विक कारकों ने बाजार को हिला दिया।
MCX पर आज की कीमतें (31 जनवरी 2026)
- चांदी (सिल्वर): MCX पर मार्च 2026 एक्सपायरी वायदा भाव 2,91,922 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ (पिछले दिन 3,99,893 रुपये से 1,07,971 रुपये की गिरावट)। हाई लेवल 4,20,048 रुपये था।
- सोना (गोल्ड): अप्रैल 2026 एक्सपायरी वायदा भाव 1,50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद (पिछले दिन 1,83,962 रुपये से 33,113 रुपये की गिरावट)। रिकॉर्ड हाई 1,93,096 रुपये था।
- फिजिकल मार्केट: दिल्ली-मुंबई में 24 कैरेट सोना लगभग 16,900-16,934 रुपये प्रति ग्राम, चांदी 394-395 रुपये प्रति ग्राम (या 3.94-3.95 लाख प्रति किलो) के आसपास ट्रेड कर रही है। कुछ शहरों में मामूली अंतर है।
यह गिरावट पिछले कुछ दिनों की तेजी के बाद आई, जहां चांदी 170% और सोना 76% से ज्यादा चढ़ चुके थे।

गिरावट के मुख्य कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह ‘बुलबुला फूटने’ जैसा करेक्शन है। प्रमुख कारण:
- भारी मुनाफावसूली (Profit Booking): रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद निवेशक और
- फंड्स ने बड़े पैमाने पर बिकवाली की। ईटीएफ और फ्यूचर्स में लिक्विडेशन हुआ।
- अमेरिकी डॉलर की मजबूती: डॉलर इंडेक्स में तेजी से कमोडिटी महंगी हो गईं, जिससे मांग घटी।
- यूएस ट्रेजरी यील्ड में उछाल और फेड चेंज: ट्रंप के बयानों से जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने के संकेत मिले। फेड चेयर में केविन वार्श की नियुक्ति की खबर से सुरक्षित निवेश (सोना-चांदी) से मोहभंग हुआ।
- ओवरबॉट कंडीशन: कीमतें बहुत तेजी से चढ़ीं, जिससे टेक्निकल करेक्शन जरूरी हो गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्पॉट सिल्वर 37% तक गिरा, जो रिकॉर्ड फॉल है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
- यह गिरावट शॉर्ट टर्म में दर्दनाक है, लेकिन लॉन्ग टर्म में सोना-चांदी अभी भी मजबूत दिख रहे हैं।
- 2025 में चांदी 170% चढ़ी, सोना 76%। 2026 में सेंट्रल बैंक खरीद, इंडस्ट्रियल डिमांड
- (सोलर, AI), और सप्लाई डेफिसिट से रिकवरी की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है
- कि यह करेक्शन खरीदारी का मौका हो सकता है, खासकर शादी सीजन में।
- लेकिन वोलेटिलिटी ज्यादा है, इसलिए 15% से ज्यादा एक्सपोजर न रखें।
आगे क्या होगा?
- बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। डॉलर, फेड पॉलिसी, और ग्लोबल इकोनॉमी पर नजर रखें।
- अगर डॉलर कमजोर होता है या जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ता है
- तो रिकवरी तेज हो सकती है। फिलहाल, निवेशकों को धैर्य रखना चाहिए
- और छोटे-छोटे लॉट में खरीदारी पर विचार करें।











