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मकर संक्रांति 2026 राजस्थान में बहुओं की अनोखी परंपराएं ससुर को सीढ़ी चढ़ाना और देवर को घेवर खिलाना!

On: January 13, 2026 6:05 AM
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मकर संक्रांति

मकर संक्रांति : उत्तर भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जो फसल, सूर्य देव की पूजा और नई शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन 14 जनवरी 2026 को बुधवार को मनाया जाएगा। दोपहर 3:13 बजे सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे पुण्यकाल शुरू होगा। राजस्थान में यह त्योहार सिर्फ पतंगबाजी और तिल-गुड़ से नहीं, बल्कि परिवारिक रिश्तों को मजबूत करने वाली अनोखी और पौराणिक परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। खासकर बहुएं इस दिन कई रस्में निभाती हैं, जो सास-ससुर और देवर-भाभी के रिश्ते में मिठास और सम्मान लाती हैं।

मकर संक्रांति का महत्व राजस्थान में

राजस्थान में मकर संक्रांति को उत्तरायण के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है। सूर्य की दिशा उत्तर की ओर होने से यह दिन शुभ माना जाता है। लोग स्नान-दान करते हैं, तिल, गुड़, कंबल, अनाज आदि का दान करते हैं। जोधपुर और मारवाड़ क्षेत्र में यह त्योहार लोहड़ी के साथ भी जुड़ा होता है, जहां अलाव जलाकर तिल-मूंगफली अर्पित की जाती है। लेकिन सबसे खास हैं बहुओं की पारंपरिक रस्में, जो परिवार में सौहार्द और खुशहाली का संदेश देती हैं।

मकर संक्रांति
मकर संक्रांति

बहुओं द्वारा निभाई जाने वाली प्रमुख परंपराएं

सास को सीढ़ियों से उतारना और ससुर को जगाना राजस्थान की कई जगहों पर नवविवाहिता बहुएं इस दिन सास-ससुर के लिए विशेष नेगचार करती हैं।

  • बहू सोते हुए ससुर को जगाती है और उन्हें नेग (गिफ्ट) देती है।
  • सास को छत या ऊंची जगह पर ले जाकर सीढ़ियों से उतारा जाता है।
  • सबसे प्रसिद्ध रस्म है सीढ़ी चढ़ाने की – बहू सास-ससुर के लिए सीढ़ियों पर स्वास्तिक बनाती है, नेग रखती है और फिर उन्हें चढ़ाकर उतारती है। यह परंपरा बुजुर्गों के सम्मान, सेवा और परिवार में मिठास लाने का प्रतीक है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

देवर को घेवर खिलाना मकर संक्रांति का सबसे स्वादिष्ट और भावुक हिस्सा है घेवर। बहू इस दिन देवर को हाथ से घेवर खिलाती है। यह रस्म देवर-भाभी के प्यार और भाई-बहन जैसे रिश्ते को मजबूत करती है। घेवर राजस्थान का पारंपरिक मिठाई है, जो केसर, घी और चाशनी से बनता है। इसे खिलाने से परिवार में खुशियां बनी रहती हैं।

अन्य रस्में और नेगचार

  • रूठी सास को मनाने के लिए बहू पसंद की चीजें लेकर मंदिर जाती है और भेंट चढ़ाकर मनाती हुई लौटती है।
  • ननद को केसर-दूध से स्नान करवाकर नेग दिया जाता है।
  • सुहागिनें महालक्ष्मी मंदिर जाकर सुहाग की सामग्री भेंट करती हैं। ये सभी रस्में प्राचीन काल से चली आ रही हैं
  • और परिवार के हर सदस्य को जोड़ती हैं।

    मकर संक्रांति के पारंपरिक व्यंजन

    इस दिन घरों में राजस्थानी स्वाद का मेला लगता है। प्रमुख व्यंजन हैं:

    • घेवर – देवर को खिलाने के लिए मुख्य
    • तिल के लड्डू, गुड़-तिल की चिक्की
    • चिक्की, रेवड़ी
    • दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी
    • केर-सांगरी और मिठाईयां

    ये व्यंजन ठंड में गर्माहट देते हैं और पोषण से भरपूर होते हैं।

    • मकर संक्रांति 2026 सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों को निखारने और परिवार में प्रेम बढ़ाने का अवसर है।
    • राजस्थान की ये अनोखी परंपराएं – सीढ़ी चढ़ाना, ससुर को जगाना, देवर को घेवर खिलाना – दिखाती हैं
    • कि हमारी संस्कृति कितनी गहरी और भावुक है। इस बार 14 जनवरी को इन रस्मों को निभाएं
    • दान-पुण्य करें, पतंग उड़ाएं और परिवार के साथ खुशियां बांटें।

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