MCQ Tests Daily Quiz / Live Quiz Mock Test Practice Sets PYQ Courses Study Material Current Affairs Govt Exams Latest Updates Free Notes Downloads

BHEL शेयर गिरावट भारत चीनी कंपनियों पर सरकारी ठेकों की पाबंदी हटा सकता है 2026 में बड़ा आर्थिक बदलाव?

On: April 11, 2026 5:45 AM
Follow Us:
BHEL शेयर गिरावट

BHEL शेयर गिरावट : भारत सरकार चीनी कंपनियों पर लगे पांच साल पुराने प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय सरकारी ठेकों में बोली लगाने वाली चीनी फर्म्स के लिए रजिस्ट्रेशन और सुरक्षा मंजूरी की अनिवार्यता खत्म करने पर काम कर रहा है। यह फैसला 2020 की भारत-चीन सीमा झड़प के बाद लगाए गए प्रतिबंधों को ढीला करने वाला होगा, जिससे चीनी कंपनियां फिर से भारतीय सरकारी प्रोजेक्ट्स में हिस्सा ले सकेंगी। अनुमान है कि इससे 700-750 अरब डॉलर के सरकारी ठेकों का बाजार प्रभावित होगा।

यह खबर 8 जनवरी 2026 को सामने आई, जब रॉयटर्स और अन्य मीडिया ने सरकारी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अंतिम निर्णय लेगा। पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति ने भी प्रतिबंधों में ढील देने की सिफारिश की है। इस कदम से भारत-चीन व्यापारिक संबंधों में नई गर्माहट आने की उम्मीद है, खासकर जब सीमा पर तनाव कम हो रहा है।

BHEL शेयर गिरावट
BHEL शेयर गिरावट

प्रतिबंध लगने की पृष्ठभूमि

  • 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सैन्य झड़प के बाद सरकार ने पड़ोसी देशों (मुख्य रूप से चीन)
  • की कंपनियों पर सख्त नियम लागू किए थे। इनके तहत:
  • सरकारी ठेकों के लिए बोली लगाने से पहले रजिस्ट्रेशन और राजनीतिक-सुरक्षा मंजूरी जरूरी थी।
  • इससे चीनी फर्म्स प्रभावी रूप से सरकारी प्रोजेक्ट्स से बाहर हो गईं।
  • विशेष रूप से विद्युत क्षेत्र में चीनी उपकरणों के आयात पर रोक लगी
  • जिससे भारत की तापीय ऊर्जा क्षमता को 307 गीगावाट तक बढ़ाने की योजना प्रभावित हुई।
  • प्रतिबंधों से कई सरकारी विभागों को परियोजनाओं में देरी, सामग्री की कमी और लागत बढ़ने की समस्या हुई।
  • अब इन मुश्किलों को देखते हुए ढील देने का प्रस्ताव आया है।

प्रतिबंध हटाने के कारण

  • सीमा तनाव में कमी: भारत-चीन संबंध सुधर रहे हैं। सीधी उड़ानें शुरू हो चुकी हैं
  • चीनी पेशेवरों को बिजनेस वीजा में आसानी मिली है।
  • परियोजना देरी: कई विभागों ने शिकायत की कि प्रतिबंधों से इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स रुके हैं।
  • आर्थिक जरूरत: सस्ते और तेज उपकरण उपलब्धता के लिए चीनी कंपनियों की जरूरत महसूस की जा रही है।
  • हालांकि, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर चीनी कंपनियों की पाबंदी अभी बरकरार रहेगी।

शेयर बाजार पर असर

इस खबर के बाद भारतीय मशीनरी और उपकरण कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई।

  • बीएचईएल के शेयर 10% से ज्यादा गिरे।
  • हिताची एनर्जी इंडिया 5.88% और एबीबी इंडिया 4.86% नीचे आए। कारण: चीनी कंपनियां सस्ते दामों पर कॉम्पिटिशन करेंगी, जिससे भारतीय फर्म्स पर दबाव बढ़ेगा। ब्रोकरेज फर्म्स का मानना है कि थर्मल पावर सेक्टर में बीएचईएल सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है।

भारत-चीन संबंधों पर प्रभाव

यह कदम द्विपक्षीय व्यापार को बूस्ट दे सकता है। हाल में प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा और अमेरिका के साथ बढ़ते टैरिफ विवाद के बीच भारत चीन के साथ गहरे व्यापारिक रिश्ते चाहता है। लेकिन विशेषज्ञ सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि सुरक्षा चिंताएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुईं।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या मतलब?

  • फायदे: परियोजनाएं तेज होंगी, लागत कम होगी, ऊर्जा और इंफ्रा सेक्टर को बूस्ट मिलेगा।
  • नुकसान: घरेलू कंपनियों पर कॉम्पिटिशन बढ़ेगा, आत्मनिर्भर भारत अभियान पर सवाल उठ सकते हैं। अगर PMO मंजूरी देता है, तो 2026 में यह बदलाव लागू हो सकता है।

चीनी कंपनियों पर सरकारी ठेकों की पाबंदी हटाना भारत की आर्थिक और कूटनीतिक रणनीति का बड़ा संकेत है। सीमा शांति के साथ व्यापार को प्राथमिकता देने का यह फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। लेकिन घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों का संतुलन जरूरी होगा। यह खबर भारत-चीन संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। आगे की अपडेट्स पर नजर रखें!

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now