BHEL शेयर गिरावट : भारत सरकार चीनी कंपनियों पर लगे पांच साल पुराने प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय सरकारी ठेकों में बोली लगाने वाली चीनी फर्म्स के लिए रजिस्ट्रेशन और सुरक्षा मंजूरी की अनिवार्यता खत्म करने पर काम कर रहा है। यह फैसला 2020 की भारत-चीन सीमा झड़प के बाद लगाए गए प्रतिबंधों को ढीला करने वाला होगा, जिससे चीनी कंपनियां फिर से भारतीय सरकारी प्रोजेक्ट्स में हिस्सा ले सकेंगी। अनुमान है कि इससे 700-750 अरब डॉलर के सरकारी ठेकों का बाजार प्रभावित होगा।

यह खबर 8 जनवरी 2026 को सामने आई, जब रॉयटर्स और अन्य मीडिया ने सरकारी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अंतिम निर्णय लेगा। पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति ने भी प्रतिबंधों में ढील देने की सिफारिश की है। इस कदम से भारत-चीन व्यापारिक संबंधों में नई गर्माहट आने की उम्मीद है, खासकर जब सीमा पर तनाव कम हो रहा है।

BHEL शेयर गिरावट
BHEL शेयर गिरावट

प्रतिबंध लगने की पृष्ठभूमि

प्रतिबंध हटाने के कारण

शेयर बाजार पर असर

इस खबर के बाद भारतीय मशीनरी और उपकरण कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई।

भारत-चीन संबंधों पर प्रभाव

यह कदम द्विपक्षीय व्यापार को बूस्ट दे सकता है। हाल में प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा और अमेरिका के साथ बढ़ते टैरिफ विवाद के बीच भारत चीन के साथ गहरे व्यापारिक रिश्ते चाहता है। लेकिन विशेषज्ञ सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि सुरक्षा चिंताएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुईं।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या मतलब?

चीनी कंपनियों पर सरकारी ठेकों की पाबंदी हटाना भारत की आर्थिक और कूटनीतिक रणनीति का बड़ा संकेत है। सीमा शांति के साथ व्यापार को प्राथमिकता देने का यह फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। लेकिन घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों का संतुलन जरूरी होगा। यह खबर भारत-चीन संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। आगे की अपडेट्स पर नजर रखें!